है अपरम्पार तेरी माया,
ओ मईयां शेरावाली,
जय जय दुर्गे माँ काली,
जय जय हो पहाड़ा वाली।।
तर्ज – जहाँ डाल डाल पर।
जो मान करे तेरा मईयां,
वो तेरी शक्ति पाए,
जय माँ जय माँ जय माँ जय माँ,
दीन दुखी को मिले सहारा,
जो शरणं तेरी में आए,
माँ शरण तेरी में आए,
सदा भक्त का मान करे,
तू संकट हरने वाली,
जय जय दुर्गे माँ काली,
जय जय हो पहाड़ा वाली।।
सकल जगत की जननी तू ही,
दुर्गे माँ कहलाई,
जय माँ जय माँ जय माँ जय माँ,
श्रृष्टि का आधार तुम्ही हो,
कण कण बिच समाई,
माँ कण कण बिच समाई,
जिसने नाम रखा तेरा,
शुभ दृष्टि उस पर डाली,
जय जय दुर्गे माँ काली,
जय जय हो पहाड़ा वाली।।
शुम्भ निशुम्भ को मारा था,
जब काली रूप बनाया,
जय माँ जय माँ जय माँ जय माँ,
देख तेरा रण चंडी रूप,
दानव थर थर थरराया,
दानव थर थर थरराया,
शिव ने शांत क्रोध किया,
तू बन गई मेहरावाली,
जय जय दुर्गे माँ काली,
जय जय हो पहाड़ा वाली।।
हो दयामई वरदानी माँ,
करूणा अपनी दिखलाओ,
जय माँ जय माँ जय माँ जय माँ,
जगत पाप से पुनः भरा,
दुष्टों को मार गिराओ,
दुष्टों को मार गिराओ,
‘सुरेन्द्र सिंह’ आव्हान करे,
तेरी सेवा जिसने ठाली,
जय जय दुर्गे माँ काली,
जय जय हो पहाड़ा वाली।।
है अपरम्पार तेरी माया,
ओ मईयां शेरावाली,
जय जय दुर्गे माँ काली,
जय जय हो पहाड़ा वाली।।
गायिका – ऋतू रुहेला।
लेखक – सुरेन्द्र सिंह निठौरा।
9999641853








