गोविंद थे छो दया निधान झोली भर दो जी भगवान

गोविंद थे छो दया निधान झोली भर दो जी भगवान

गोविंद थे छो दया निधान,
झोली भर दो जी भगवान,
राखो घर आया को मान,
सुनावा कितना।।



आप बिराजो निज मंदिर में,

सामे में कंचन मेहल,
राधा जी ने लेर बाग में,
रोज करो थे सेर,
मंडफिया नगरी आलीशान,
मंडफिया नगरी आलीशान,
जीमे बैठा जी भगवान,
राखो घर आया को मान,
सुनावा कितना।।



बचपन बीत जवानी बीती,

फिर भी गणा दुख जेलया,
आप जैसा के पाले पड़कर,
फिर भी पापड़ बेलया,
मैं तो टाबर छू नादान,
मैं तो टाबर छू नादान,
अर्जी सुण ज्यो जी भगवान,
राखो घर आया को मान,
सुनावा कितना।।



बड़ा लोग या साची केथा,

दीपक तले अंधेरा,
घर का पूत कुंवारा डोले,
पड़ोस्या के फेरा,
गोपाल थे छो अकलवान,
गोपाल थे छो अकलवान,
अर्जी सुण ज्यो जी भगवान,
राखो घर आया को मान,
सुनावा कितना।।



मैं गरजी अर्जी कर हारयो,

आप मूंद लिया कान,
मरता दम तक कहतो रहस्यों,
बण्या रहो यजमान,
गोपाल थे हो अकलवान,
गोपाल थे हो अकलवान,
मैं तो बालक हूँ नादान,
राखो घर आया को मान,
सुनावा कितना।।



गोविंद थे छो दया निधान,

झोली भर दो जी भगवान,
राखो घर आया को मान,
सुनावा कितना।।

Singer – Dharmendra Gawdi,
Writer : – Vinu Sonagar
7023805071


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