पहचान सके तो पहचान घट घट में बसे है भगवान

पहचान सके तो पहचान घट घट में बसे है भगवान

पहचान सके तो पहचान,
घट घट में बसे है भगवान।।



चंदा की चांदनी,

सूरज की रोशनी,
तारो की झील मिलजन,
जिनकी शोभा अगम अपार,
घट घट में बसे है भगवान,
पेहचान सके तो पेहचान,
घट घट में बसे है भगवान।।



बिना रे सत के चले ना धरती,

बिन थंभे आसमान,
जिनकी महिमा वरणी न जाय,
घट घट में बसे है भगवान,
पेहचान सके तो पेहचान,
घट घट में बसे है भगवान।।



राम बिना मेरी सुनी अयोद्धया,

बिन राधा घनश्याम,
जिनकी शोभा वरणी न जाय,
घट घट में बसे है भगवान,
पेहचान सके तो पेहचान,
घट घट में बसे है भगवान।।



तुलसी दास आश रघुवर की,

थारो जन्म सफल हो जाय,
घट घट में बसे है भगवान,
पेहचान सके तो पहचान,
घट घट में बसे है भगवान।।



पहचान सके तो पहचान,

घट घट में बसे है भगवान।।

– गायक & प्रेषक –
श्यामनिवास जी
9024989481


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