दीन दुखी की बंधावै धीर,
जोतराम बदलै तकदीर।।
तर्ज – सुण मेरे मौसा सुणी के ना।
भभूता सिद्ध का चेल्ला यू,
देव घणा अलबेला यू,
ठण्डी शीतल सै तासीर,
जोतराम बदलै तकदीर।।
जो भी शरण म आ जावै,
खाली हाथ ना वो जावै,
सबके काटै दुख की जंजीर,
जोतराम बदलै तकदीर।।
प्यार बांटणे आला सै,
नहीं नाटणे आला सै,
शिव जी राजा यू स वजीर,
जोतराम बदलै तकदीर।।
कृष्न का नाम जणा राखया,
मुआणीया भगत कुहा राखया,
करै गजेन्द्र भजन म सीर,
जोतराम बदलै तकदीर।।
दीन दुखी की बंधावै धीर,
जोतराम बदलै तकदीर।।
लेखक – गजेन्द्र स्वामी कुड़लणीया।
9996800660
गायक – विशाल पांचाल बूच्ची।








