जोतराम बाबा जब,
खाड़े म चढै,
कोई आग्गै ना अडै।।
तर्ज – देवी तेरे रुप का तो दीवा सा बलै।
जब आग क्रोध की भड़कै,
सब स्याणे सेवड़े फड़कैं,
सोचैं कित सी बड़ैं,
कोई आगै ना अड़ै।।
भूतां कै मारै लाठी,
करदे स उनकै उचाटी,
वैं तो पायां म पड़ैं,
कोई आगै ना अड़ै।।
यो शेर बागड़ी हठीला,
नखरे नै करदे ढीला,
फेर पार ना पड़ै,
कोई आगै ना अड़ै।।
सेवा में मुआणै बलिन्द्र,
करै बाबा नै नमन गजेन्द्र,
विशाल भी उढ़ै,
कोई आगै ना अड़ै।।
जोतराम बाबा जब,
खाड़े म चढै,
कोई आग्गै ना अडै।।
लेखक – गजेन्द्र स्वामी कुड़लणीया।
9996800660
गायक – विशाल पांचाल बूच्ची।








