सुरसत सिमरूं शारदा माँ,
गणपत लागू पाय भवानी,
गणपत लागू पाय,
दाता खेतेश्वर री महिमा गाऊं,
सुणजो ध्यान लगाय,
भाईड़ा सुणजो ध्यान लगाय।।
दर्शन ने आसोतरा हालों रे,
थोरा बेड़ा होजाइ पार,
हो ब्रह्मा रा अवतार रे,
म्हारे अंतत रा आधार,
ऊंचो आपरो बनियो देवरो,
आसोतरा रे माय,
खेतेश्वर आसोतरा रे माय।।
राजपुरोहित कुल शरणे आवे,
नित उठ ध्यान लगाय,
आसोतरा में आप बिराजो,
धज्जा फरूके असमान
हो धज्जा फरूके असमान,
पुरोहित कुल ने दर्शन देवो,
नित रठे थोरो नाम।।
कुल ने तारण जीव उभारन,
आया जुग रे माय,
खेतेश्वर आया जुग रे माय,
पुनम रो दिन आपरो,
दीवला री जोत जगाय,
आसोतरा में धाम सोवणो,
आवे नर ने नार,
खेतेश्वर आवे नर ने नार,
राजपुरोहित सगला शरणे आवे,
नित आवे थोरे द्वार।।
नित उठ थोरो नाम जपु मैं,
सफल होवे सब काम,
खेतेश्वर सफल होवे सब काम,
दर्शन सू दुखड़ा मीट जावे,
नित आवूं थोरे धाम,
मुकेश प्रजापत महिमा गावे,
शरणे थोरे आए,
खेतेश्वर दाता रि महिमा गावे,
आसोतरा रे माय।।
मुकेश प्रजापति महिमा लिखे,
भक्त मंडल जस गाए,
आसोतरा मे सू शरणे आय,
पुरोहित कुल सगला आवे,
नीत आवे थोरे द्वार,
नित उठ खेतेश्वर ने मनावु,
माथे राखो छतर छाय।।
सुरसत सिमरूं शारदा माँ,
गणपत लागू पाय भवानी,
गणपत लागू पाय,
दाता खेतेश्वर री महिमा गाऊं,
सुणजो ध्यान लगाय,
भाईड़ा सुणजो ध्यान लगाय।।
गायक – मुकेश प्रजापति।
9257936364
देखें – खेतेश्वर भजन।








