काम अर्थ और मोक्ष धर्म है पावे पदार्थ चारि ओ साधु भई
काम अर्थ और मोक्ष धर्म है, काम अरत ओर मोक्ष धर्म है, पावे पदार्थ चारि ओ साधु भई, भाग बडा...
Read moreDetailsकाम अर्थ और मोक्ष धर्म है, काम अरत ओर मोक्ष धर्म है, पावे पदार्थ चारि ओ साधु भई, भाग बडा...
Read moreDetailsबाबा अमरनाथ महादेव, थाने खम्मा घणी, थे हो ऊंचा पर्वत वासी, थाने खम्मा घणी, पर्वत चढता चढता बोलो, हर हर...
Read moreDetailsमनडो नहीं लागे माला में, नही है जीव थारो भजनो में, नहीं है जीव थारो भजनो में, मनडो नी अब...
Read moreDetailsईन्द्रराजा कद बरसेलो रे, मनडा रो मोरयो, पिऊ पीऊं बोले दिन रात, ईन्द्रराजा कद बरसलो रे।। जेठ असाढा में पड्यो...
Read moreDetailsबन में डोले राम लखन दोनों भाई रे, जाने सीता नजर नही आई रे, सीता नजर नहीं आई रे, वाने...
Read moreDetailsसुमिरन में सुख भारी, देखा है हमने, सुमिरन मे सुख भारी, देखा है हमने, सुमिरन मे सुख भारी।। ए राजा...
Read moreDetailsबन्नो म्हारो शंकर भोलेनाथ, बन्नी म्हारी गवरा लाडली।। बराती शिवजी गजब का लाया ओ, देवता सभी रूप धर आया ओ,...
Read moreDetailsथारी मोह माया ने, छोड रामजी ने भज रे, थारी उमर बीती जाय रे, क्रोध ने तज रे।। थारा सिर...
Read moreDetailsराजा मोरध्वज की कथा, दोहा - जो कुछ लिखा लिलाट पर, मेट सके न कोई, कोटि जतन करते फिरो, भाई...
Read moreDetailsमात पिता और गुरू चरणों में, दंडवत बारम्बार, हम पर किया बडा़ उपकार, हम पर किया बडा़ उपकार, ममता ज्ञान...
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