कागज मंड गयो रे कर्मा को अब तेरो कैसे मिटे दुखड़ों लिरिक्स
कागज मंड गयो रे कर्मा को, दोहा - तारा की ज्योति में चंद्र छिपे ना, सूर्य छिपे ना बादल छाया,...
Read moreDetailsकागज मंड गयो रे कर्मा को, दोहा - तारा की ज्योति में चंद्र छिपे ना, सूर्य छिपे ना बादल छाया,...
Read moreDetailsप्रितम पायो रे काया में, दोहा - पूरण भेंट लिया गुरु पूरण, पूरण बोध भया अज मोई, पूरण की पहचान...
Read moreDetailsभजन कर नर स्वांसों की, दोहा - उपकार बडो निज धर्म कहे, तन से मन से धन से कर रे,...
Read moreDetailsपाखंड में नर क्यों भटका खावे रे, दोहा - उपकार बडो निज धर्म कहे, तन से मन से धन से...
Read moreDetailsआजा खाजा रे दवाई, गुरुजी वैद्य आया। दोहा - टेडे मेडे गोलमोल, सिलावट पाषाण को, विविध प्रकार, धर मूर्ति बनाय...
Read moreDetailsयूँ जन्म सफल हो जावे रे, दोहा - संग सदा करिए तिन को, जिन संग कलंक लगे नहीं कोई, दूर...
Read moreDetailsमानव ऐसी करनी कर रे, पाछे लोग करें गुणगान। दोहा - गुजरान भलो दुख दिन पणे, कर काज अनीति कमावणो...
Read moreDetailsमानव इतना तो कर आके, दोहा - इतिहास बने इस जीवन का, जन जीवन में कुछ तो कर रे, जन...
Read moreDetailsबीरा मत करजे रे अभिमान, पिंजरा टूटेला। दोहा - आया जहां से सेर करने, हे मुसाफिर तू यहां, सेर करके...
Read moreDetailsघायल हो गया रे, शब्दा की लागी ज्ञान कटारी रे। दोहा - माटी कितना दुख सहा, गई कुमार के पास,...
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