सिर पर चुनरी है लाल,
और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार,
माँ ममता की मूरत हो,
माँ ममता की मूरत हो।।
तर्ज – ना कजरे की धार।
सूरत है भोली भाली,
लगती है छवि निराली,
सूरत है भोली भाली,
लगती है छवि निराली,
तू जग की रखवाली,
करती है बेड़ा पार।
सर पर चुनरी हैं लाल,
और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार,
मां ममता की मूरत हो,
मां ममता की मूरत हो।।
दरबार तुम्हारा मैया,
लगता है बड़ा सुहाना,
दरबार तुम्हारा मैया,
लगता है बड़ा सुहाना,
नित जगमग है ज्योति,
गूंजे है जय जयकार।
सर पर चुनरी हैं लाल,
और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार,
मां ममता की मूरत हो,
मां ममता की मूरत हो।।
जगदंबे शेरावाली,
महिमा ना जाए बखानी,
जगदंबे शेरावाली,
महिमा ना जाए बखानी,
हम भक्तों के घर भी,
आ जाओ मां एक बार।
सर पर चुनरी हैं लाल,
और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार,
मां ममता की मूरत हो,
मां ममता की मूरत हो।।
सिर पर चुनरी है लाल,
और सोलह है श्रृंगार,
क्या खूब सजा दरबार,
माँ ममता की मूरत हो,
माँ ममता की मूरत हो।।
🎤 Singer – Shekhar Mourya
✍️ Lyrics – Shekhar Mourya








