हे भेरूजी थांका,
सोना और रूपा का देवल,
खजूरिया नगरी में अजब बनया,
भेरूजी लागी जातरीयां की भीड़,
भगत थारे नाच रिया।।
हे भेरूजी,
आई वो मालन थांका द्वार,
फूलों की माला लेर खड़ी,
मालगुड़ नगरी से आई द्वार,
भेरूजी से अरज करे।।
हे भेरूजी,
आई वो गुजर की नार,
थारे चरणों में अरज करे,
भेरूजी लीजो-लीजो,
जावणी को भोग,
गुजरिया थारे द्वार खड़ी।।
हे भेरूजी,
कलयुग में थारी महिमा भारी,
खजूरिया नगरी में मंदिर बन्यो,
सज धज के आया सारा,
भगत थारे द्वार,
थारी दया से नैया पार होवे।।
हे भेरूजी,
आया वो दुखिया थारे द्वार पर,
थारे चरणों में आस लगाई है,
भेरूजी दीजो-दीजो सबको आशीर्वाद,
भगत थारी महिमा गावे है।।
हे भेरूजी,
आया वो जाटां की द्वार,
अन्न-धन को वरदान मांगे,
भेरूजी देवो-देवो सबको साथ,
भेरुजी थारा द्वारा आया।।
हे भेरूजी थांका,
सोना और रूपा का देवल,
खजूरिया नगरी में अजब बनया,
भेरूजी लागी जातरीयां की भीड़,
भगत थारे नाच रिया।।
गायक – भेरूपुरी जी सोपुरा।
प्रेषक – दीपक वैष्णव।
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