भरोसे थोरे चाले ओ सतगुरु मारी नाव भजन लिरिक्स

भरोसे थोरे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव,
सतगुरु मारी नाव दयालु,
धिन गुरु मारी नाव,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव।।



नही है मारे कुटम्ब कबीलो,

नही है मारे परिवार,
आप बिना दूजो नही दिखे,
जग में तारणहार,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव,
सतगुरु मारी नाव दयालु,
धिन गुरु मारी नाव,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव।।



अरे भवसागर उडो घणो रे,

तिरु न उतरु पार,
निगे करू तो निगे नी आवे,
भवसागर री धार,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव,
सतगुरु मारी नाव दयालु,
धिन गुरु मारी नाव,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव।।



डूबी जहाज समन्द में मेरी,

किण विध उतरु पार,
काम क्रोध मगरमच्छ डोले,
खावण ने है तैयार,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव,
सतगुरु मारी नाव दयालु,
धिन गुरु मारी नाव,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव।।



सतगुरु रूपी जहाज बना लो,

इण विध उतरो पार,
अरे सूरत जहाजड़ी ज्ञान बांटना,
केवट सिरजण हार,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव,
सतगुरु मारी नाव दयालु,
धिन गुरु मारी नाव,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव।।



कहे कबीर सुणो भाई संतो,

बह जाता मझधार,
रामानंद मिल्या गुरु पूरा,
बेड़ा कर दिया पार,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव,
सतगुरु मारी नाव दयालु,
धिन गुरु मारी नाव,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव।।



भरोसे थोरे चाले ओ,

सतगुरु मारी नाव,
सतगुरु मारी नाव दयालु,
धिन गुरु मारी नाव,
भरोसे थारे चाले ओ,
सतगुरु मारी नाव।।

गायक – मोइनुद्दीनजी मनचला, प्रकाशजी माली।
प्रेषक – पुखराज जी पटेल।
9784417723


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