बार बार सतगुरू समझावे ऐसो अवसर बहुरि न आवे

बार बार सतगुरू समझावे,
ऐसो अवसर बहुरि न आवे।।



राम नाम भजलो शिश भाई,

मुक्ती होवन की जुक्ती बताई,
बार बार सतगुरू समझावें,
ऐसो अवसर बहुरिन आवे।।



थिर नही हस्थी थिर नही धोडा,

थिर नही नार पुरूष का जोडा,
बार बार सतगुरू समझावें,
ऐसो अवसर बहुरिन आवे।।



कहां अजमाल कहां जसवन्था,

कहां गये राजा राज करन्ता,
बार बार सतगुरू समझावें,
ऐसो अवसर बहुरिन आवे।।



कहे सुखराम राम रा बन्दा,

काटे जम फन्दा,
बार बार सतगुरू समझावें,
ऐसो अवसर बहुरिन आवे।।



बार बार सतगुरू समझावे,

ऐसो अवसर बहुरिन आवे।।

गायक / प्रेषक – राजु चोधरी असावरी।
8875155461


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