अपनी कृपा का दे दो नजराना राधे हमको बसा लो बरसाना

अपनी कृपा का दे दो नजराना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना,
इतना ना हमें तरसाना,
इतना ना हमें तरसाना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना।।



तुमने तो अधमों की बिगड़ी सवारी,

मेरे भी पापों की गठरी है भारी,
अब लुटा दो रहमत का खजाना,
अब लुटा दो रहमत का खजाना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना,
अपनी किरपा का दे दो नजराना,
राधे हमको बसा लो बरसाना।।



ना किया कुछ भजन आके संसार में,

फस गया इस जगत के झूठे प्यार में,
अपने चरणों में दे दो ठिकाना,
अपने चरणों में दे दो ठिकाना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना,
अपनी किरपा का दे दो नजराना,
राधे हमको बसा लो बरसाना।।



थकने लगा हूँ बहुत मैं तो हारा,

आकर किशोरी जू दे दो सहारा,
बहुत बीती थोड़ी तुम निभाना,
बहुत बीती थोड़ी तुम निभाना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना,
अपनी किरपा का दे दो नजराना,
राधे हमको बसा लो बरसाना।।



ये भी पता है खतावार हूँ मैं,

कर्मो पे अपने शर्मशार हूँ मैं,
‘चित्र विचित्र’ को श्यामा ना भुलाना,
‘चित्र विचित्र’ को श्यामा ना भुलाना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना,
अपनी किरपा का दे दो नजराना,
राधे हमको बसा लो बरसाना।।



क्या मैं कहूं तुमसे अपनी कहानी,

तड़पते हैं ऐसे मछली बिन पानी,
अब लुटा दो रहमत का खजाना,
अब लुटा दो रहमत का खजाना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना,
अपनी किरपा का दे दो नजराना,
राधे हमको बसा लो बरसाना।।



दर पे तेरे आस लेकर के आए,

तेरा ही विश्वास मन में समाए,
‘चित्र विचित्र’ को भी अपनाना,
‘चित्र विचित्र’ को भी अपनाना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना,
अपनी किरपा का दे दो नजराना,
राधे हमको बसा लो बरसाना।।



अपनी कृपा का दे दो नजराना,

राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना,
इतना ना हमें तरसाना,
इतना ना हमें तरसाना,
राधे हमको बसा लो बरसाना,
बरसाना राधे हमको बसा लो बरसाना।।

स्वर – चित्र विचित्र जी महाराज।
प्रेषक – रवि गगनेजा।
7037734000


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