ऐसी सतगुरु महिमा प्यारी,
कोई नर गावेगा,
गावेगा वही नर पावेगा।।
सोहम शब्द गुरु ने दीना,
मेने हृदय मे रख लीना,
हमने ज्ञान गुरु से लीना,
इंगला पिंगला,
शोध सुखमण लावेगा,
ऐसी सत गुरु महिमा प्यारी,
कोई नर गावेगा।।
नाम नाभि सें उठाया,
सीधा बंकनाल ठहराया,
मोजा सुखसागर की पाया,
नहीं बुगले का काम,
हंस कोई पावेगा,
ऐसी सत गुरु महिमा प्यारी,
कोई नर गावेगा।।
दे दिया त्रिकुटी पर डेरा,
आगे मानसरोवर गहरा,
जहाँ हंसले ने किया बसेरा,
त्रिवेणी की धार,
संत कोई नहावेगा,
ऐसी सत गुरु महिमा प्यारी,
कोई नर गावेगा।।
गुरु मोहे पनागिरी समझावे,
फूलगिरी शून मे ध्यान लगावे,
वाका आवागवम मिट जावे,
मेटे जम का दाव,
फिर नहीं आवेगा,
ऐसी सत गुरु महिमा प्यारी,
कोई नर गावेगा।।
ऐसी सतगुरु महिमा प्यारी,
कोई नर गावेगा,
गावेगा वही नर पावेगा।।
गायक – दीपगुरुजी इंदौर।
प्रेषक – घनश्याम बागवान।
( बजरंज मण्डल सिद्दीकगंज )
7879338198








