आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को,
दोहा – खाटूवाले श्याम जी,
मेरे मन में उठी उमंग,
फागुन के त्यौहार में,
मैं नाचू तोरे संग।
आयो फागणियो मेरे श्याम धणी को,
खाटू जावां रे,
आयो फागणियो,
खाटू जावां खाटू जावां,
मन ललचावे रे,
आयो फागणियों।।
हाथा में निशान लेकर,
चंग बजाता आवां रे,
सब घरघा संग पैदल चलकर,
भजन सुनाता आवां रे,
गाता और बजाता आवां,
श्याम रिझावां रे,
आयो फागणियों।।
ध्वजा नारियल सवा रूपेंया,
अर्जी सागे ल्यावां रे,
रिगंस से खाटू तक बाबा,
हसतां खिलता आवां रे,
तोरण पे यो शीश झुकाकर,
श्याम स्यू मिलस्या रे,
आयो फागणियों।।
ज्यूँ-ज्यूँ मन्दिर दिखे है म्हाने,
म्हारो मन हर्षावे रे,
धीरे-धीरे आगे बड़ता जावां,
जय-जयकार लगावां रे,
मोटो यो दरबार देखकर,
खुब भरयो दरबार देखकर,
सुध बिसराया रे,
आयो फागणियों।।
भांत-भांत का भोग लगाकर,
खुब तन्ने जिमावां रे,
माखन मिश्री खीर चुरमो,
खुब तन्ने यो भावे रे,
दाल-बाटकी साग या रोटी,
भर-भर खावे रे,
आयो फागणियों।।
आयो फागणियो मेरे श्यामधणी को,
खाटू जावां रे,
आयो फागणियो,
खाटू जावां खाटू जावां,
मन ललचावे रे,
आयो फागणियों।।
Singer – Yash & Rajat
Lyrics – Yash Khadria








