आरती उतार लो सीता रघुवर जी की लिरिक्स

आरती उतार लो,
सीता रघुवर जी की,
लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न के संग,
पवन तनय जी की,
आरती उतार लों,
सीता रघुवर जी की।।



राज सिंहासन पर बैठे है,

साथ में सीता मैया,
हनुमान सेवा में विराजे,
संग है सारे भैया,
देख छवि मन मोहित होता,
लीलाधर जी की
आरती उतार लों,
सीता रघुवर जी की।।



राज मुकट माथे पर सोहे,

धनुष बाण धारी,
बाजूबंद पीताम्बर माला,
कुंडल की छवि न्यारी,
कमल नयन श्यामल वरणा,
श्री रघुनायक जी की,
आरती उतार लों,
सीता रघुवर जी की।।



शबरी अहिल्या केवट और,

विभीषण तारण हारे,
रावण अहिरावण खर दूषण,
कुम्भकर्ण मारे,
अवतारी है हितकारी हरी,
दुष्ट दलन जी की,
आरती उतार लों,
सीता रघुवर जी की।।



पूर्ण राम दरबार में गणपति,

शिव शंकर भी सोहे,
ब्रह्मा नारद गुरुदेवा भी,
जन जन का मन मोहे,
मानस पट पर झांकी अंकित,
राम सिया जी की,
आरती उतार लों,
सीता रघुवर जी की।।



किस विधि कहे तुम्हारी महिमा,

समझ नही आये,
बस तुमसे है एक प्रार्थना,
अचल भक्ति मिल जाए,
करुणामय है राम रमापति,
रघुनंदन जी की,
आरती उतार लों,
सीता रघुवर जी की।।



मो सम दीन न दीन हित,

तुम समान रघुबीर,
अस बिचारि रघुबंस मणि,
हरहु विषम भव भीर,
कामिहि नारि पियारि जिमि,
लोभिहि प्रिय जिमि दाम,
तिमि रघुनाथ निरंतर,
प्रिय लागहु मोहि राम,
आरती उतार लों,
सीता रघुवर जी की।।



आरती उतार लो,

सीता रघुवर जी की,
लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न के संग,
पवन तनय जी की,
आरती उतार लों,
सीता रघुवर जी की।।

Upload By – Manish Prajapati
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