आओ जी नट नागरिया,
बेगासा आओ जी,
लाज बचाओ जी,
लाज बचाओ साँवरा,
मत देर लगाओ जी,
लाज बचाओ जी।।
भक्तां प तो भीड पड़ी,
प्रभु थे कैयां बिसराओ जी,
मन में तो सोचो मन मोहन,
दीनानाथ कहाओ जी,
था बिन कुण को आसरो,
महाने मत ठुकराओ जी,
बेगा आओ जी।।
ज्यूँ ज्यूँ मैं छुटकारो चाहूँ,
मोहमाया की प्यारी जी,
दुणा दुणा कंट मसोसे,
दुखड़ा बारी बारी जी,
आओ क्यों न श्याम,
अब तो दास बनाओ जी,
बेगा आओ जी।।
मात पिता कहे पुत्र हमारा,
भाई कहे भाई महारा जी,
मित्र कहे ये मित्र हमारा,
पत्नी कहे स्वामी महारा जी,
कुण को छूँ मैं नाथ,
आकर न्याव चुकाओ जी,
बेगा आओ जी।।
इक तरफ जग की मोहमाया,
खेंचां तान मचावे जी,
दुजी तरफ तो जी की अधीरता,
कौसां दूर हटावे जी,
कैयां पड़सी पार,
कोई जुगत बताओ जी,
बेगा आओ जी।।
हरया बाँस की इ मुरली म,
काईं जादू छायो जी,
इकी मीठी मीठी धुन म,
महारो जीव समायो जी,
‘दास युगल’ के कारणे,
मुरलीधर आओ जी,
बेगा आओ जी।।
आओ जी नट नागरिया,
बेगासा आओ जी,
लाज बचाओ जी,
लाज बचाओ साँवरा,
मत देर लगाओ जी,
लाज बचाओ जी।।
स्वर – भक्तगण श्री गोविन्द देव जी मंदिर।








