आजा रे भेरुजी रींगस वाला भजन लिरिक्स

कंकाली काली का जाया,
भेरुजी मतवाला रे,
ब्रह्मा जी को हाथ सीस पर,
शिव शंकर का लाला रे,
सीस ऊपर मुकुट हाथ में,
शेल शूल और भाला रे,
चौसठ योगण साथ कर,
भेरुजी तू हलकारा ये,
मैं तो तने मनाऊ भैरू मतवाला,
आजा रे भेरुजी रींगस वाला,
आजा रें भेरुजी रींगस वाला।।



इंदिरा‌सन से ऊतर्यो,

काशी में गंगा नाला रे,
वाराणसी काशी में,
उतर्यायो भैरव काला रे,
विश्वनाथ भगवान हुकुम कर,
भैरव खप्पर वाला रे,
एक हाथ में डण्ढ थारे,
गल फूलां की माला रे,
थारे द्वारे तो मैं आऊं,
कर्म का खोल ताला,
आजा रें भेरुजी रींगस वाला।।



श्मशाणा में थान भैरु,

पीवे मद का प्याला है,
जातरी आवे रे भैरू,
बकरो ल्यावे काला रे,
सवामणी होवै छ थारे,
दे भक्ता ने झाला रे,
बांझड़ी आवे रे थारे,
गोद खिलावे लाला रे,
मैं तो जै जै कार लगाऊं,
लाऊं घरवाला,
आजा रें भेरुजी रींगस वाला।।



भेरुजी के दुनिया जावे,

आपा दोनी चालां रे,
भजन बनाऊं जोर को,
अंदाज यो निराला है,
भवानी गुर्जर गांवे,
बाबा सुणजे तू नखराला रे,
आंवाला भेरुजी थारे,
अबके नहीं टालां रे,
थारा नाम सु माण्डा रे भैरू,
देखो कबडि पाला,
आजा रें भेरुजी रींगस वाला।।



कंकाली काली का जाया,

भेरुजी मतवाला रे,
ब्रह्मा जी को हाथ सीस पर,
शिव शंकर का लाला रे,
सीस ऊपर मुकुट हाथ में,
शेल शूल और भाला रे,
चौसठ योगण साथ कर,
भेरुजी तू हलकारा ये,
मैं तो तने मनाऊ भैरू मतवाला,
आजा रे भेरुजी रींगस वाला,
आजा रें भेरुजी रींगस वाला।।

गायक – भवानी सिंह गुर्जर।
प्रेषक – रमेश निरंजन।
9829120430


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