बाबा रे थारो लीलो घोड़ो,
घुमे है धोरा धरती माय,
टाबर थारा लुळ लुळ नाचे,
भादरवे महिनें देखो माय।।
भगत थारा पैदल आवें,
नाचें है नो नो देखों ताल,
कृपा तो थारी बरसे,
आनंद तो हो बरसे अपार।।
कोई तो थारे आवे पैदल,
कोई तो लावें मोटर कार,
आंधियां ने आंखा देवें,
बांजयां री गोदा रे भरायें।।
बाबा रे थारी महिमा निराली,
पर्चा रो पायो कोनी पार,
टाबरिया री सुण लो विनती,
राणी नेतल रा भरतार।।
भगत हो ‘महावीर’ गावे,
लिख रो है दास ‘सुभाष’,
टाबरिया पे कृपा राखजों,
नीले घोड़े रा असवार।।
बाबा रे थारो लीलो घोड़ो,
घुमे है धोरा धरती माय,
टाबर थारा लुळ लुळ नाचे,
भादरवे महिनें देखो माय।।
गायक – महावीर जी सांखला।
लेखक – सुभाष सारस्वा काकड़ा।
9024909170








