सुण म्हारी माता सुणजो,
म्हारी मात आईजी ओ,
भगत री आ अरजी मैया,
साम्भलो ए मां,
मां एकर विनती सुनलो,
म्हारी मात भवानी ओ,
माधव जी केवे ओ,
मन री बातडी ओ,
मां भगतो ने राह बतावो,
म्हारी जग धनीयानी मां,
आई पंथ री ध्वजा,
लहरावनी ए मां।।
मासु तो चाल्योनी जावे,
सुणो माधु बेटा ओ,
केवे आईजी मन री बातडी ओ मां,
अरे धर्म रथ बनाया,
बैलिया जोत्या ओ,
बैल मे बिराज्या अम्बे मावडी ओ मां,
ए धर्म रथ ने हाके,
ए बैल हाके ओ,
सारथी बनीया माधवजी बैल रा ओ मां।।
बिलाड़ा सु मैया चाल्या,
आया बिलावास मे ओ,
गांव गांव मे पगल्या मांडीया,
मावडी ओ मां,
बिलावास सु चाल्या,
आया नाडोल नगरी ओ,
गांव कोटड़ी में पधारीया ओ मां,
अरे आया आश्रम आया,
मां डुंगरगिरिजी रे ओ,
देवगढ़ मदारीया रा कहीजे,
बापजी ओ मां।।
डुंगरगिरिजी रा चेला,
किनी मैया री सेवा ओ,
सेवा चाकरी सु,
राजी होवीया ओ मां,
आईजी केवे सुणजो,
थे डुंगरगिरिजी ओ,
आपरा दो चेला,
म्हाने देवजो ओ राज,
केशरगिरीजी रुपगिरिजी,
चेला दीना ओ,
भगत चरना मे शिश,
निवाविया ओ मां।।
बैलिया रे साथे रेवेला,
एक हरदम रेला ओ,
दुजो तो करेला,
पुजा बडेर मे ओ मां,
मां होया रवाना आया,
बिलाड़ा नगरी ओ,
सीरवी भगत बधावे,
भाव सु ओ मां,
बाबा मंडली केवाया,
उपदेश बताया ओ,
डोराबंध बनीया,
ओ गांव गांव मे ओ मां।।
चैत्र, वैशाख, भादरवो,
माही बीज आवे ओ,
बिलाड़ा में होवे,
बैल बधावणा ओ मां,
*रायपुर सु मनीष सीरवी*,
महीमा बनावे ओ,
घणा भाव सु रवि गहलोत,
गावियो ए मां,
हेलो सुनता आवो मां,
बिलाड़ा वाली ओ,
भगता ऊपर छत्तर छाया,
राखजो ए मां।।
सुण म्हारी माता सुणजो,
म्हारी मात आईजी ओ,
भगत री आ अरजी मैया,
साम्भलो ए मां,
मां एकर विनती सुनलो,
म्हारी मात भवानी ओ,
माधव जी केवे ओ,
मन री बातडी ओ,
मां भगतो ने राह बतावो,
म्हारी जग धनीयानी मां,
आई पंथ री ध्वजा,
लहरावनी ए मां।।
गायक – रवि जी गहलोत आहोर।
लेखक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला ब्यावर राजस्थान)








