मैं जाऊँ क्यो यहाँ वहाँ,
मिला है सब मुझे यहाँ,
तेरे ही दर पे बाबोसा,
मेरी खुशी का जहाँ।।
तर्ज – फजा भी है जवां जवां।
हारा मगर टूटा नहीं,
मै जिन्दगी की राह में,
चला मगर रुका नहीं,
मंजिलो की चाह में,
ये हूँ खेल हारा नही,
हुआ तू जिसपे मेहरबाँ,
तेरे ही दर पे बाबोसा,
मेरी खुशी का जहाँ।।
गुजरते थे दूर से,
जो मुझको बिसार के,
बैठे है वो ही मिलने अब,
बांहे अपनी पसार के,
नजर कृपा की डाल कर,
जो तूने किया एहसान,
तेरे ही दर पे बाबोसा,
मेरी खुशी का जहाँ।।
जिसे रहा मैं ढूँढता,
वो बाईसा ने दिया,
फिरा के सर पे हाथ यु,
ये जीवन ही बदल दिया,
मिली मुझे बाईसा में,
“दिलबर “बाबोसा के निशा,
तेरे ही दर पे बाबोसा,
मेरी खुशी का जहाँ।।
मैं जाऊँ क्यो यहाँ वहाँ,
मिला है सब मुझे यहाँ,
तेरे ही दर पे बाबोसा,
मेरी खुशी का जहाँ।।
गायिका – आश्वस्ति सक्सेना।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – श्री हर्ष व्यास मुम्बई।
(म्यूजिक डायरेक्टर एवम कंपोजर)
मो . 9820947184








