चली कांवड़ियों की टोली,
खाके भंगिया की गोली,
कांधे गंगाजल की कावड़ उठाई रे,
बोली हर हर बम की लगाई रे।।
भोले जी के धाम चले,
सभी संग संग में,
रंग गए सब कोई,
भोले जी के रंग में,
कोई नाचे कोई गाए,
कोई तालियां बजाए,
देखो जब से यह सावन ऋतु आई रे,
बोली हर हर बम की लगाई रे।।
पहने कोई पीले वस्त्र,
कोई केसरी और लाल है,
दाढ़ी मूछ मुख पर बड़े,
रूखे सूखे बाल है,
बने बाबा के दीवाने,
चले भोले को मनाने,
देखो सुध बुध सबकी बिसराई रे,
बोली हर हर बम की लगाई रे।।
आंधी आवे पानी आवे,
चाहे तपै चाम रे,
जपते मगन चले,
भोले जी के धाम है,
जंगल हो या पहाड़ी,
पांव धरे ना पिछाड़ी,
चले बच्चे बुड्ढे लोग लुगाई रे,
बोली हर हर बम की लगाई रे।।
पहुंचकर बाबा धाम,
सब हो जाए जोश में,
स्वांग भोले जी का धर के,
नाचे सब उमंग में,
ताली हंस के बजाये,
कोई नाचे कोई गावे,
भोले भक्तों की लाज बचाई रे,
बोली हर हर बम की लगाई रे।।
चली कांवड़ियों की टोली,
खाके भंगिया की गोली,
कांधे गंगाजल की कावड़ उठाई रे,
बोली हर हर बम की लगाई रे।।
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🎤 गायक / Singer – Rajendra Jain
✍️ लेखक / Lyrics – Rajendra Jain
📜 प्रेषक / Upload By – सुभाष सारस्वा काकड़ा नोखा बीकानेर
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