राधा हूँ पुकारूँ,
पुरी द्वारीकामां,
मने मारी राधा विना,
सुनु सुनु लागे,
हजारो छे राणी,
छतां रोज सांजे,
राधिका नी यादो मने,
कांटा जेवी लागे,
राधा हुं पुकारुं,
पुरी द्वारीकामां।।
वृन्दावन नी वाटें,
तरसे मारी आंखो,
राधा तारी यादो ने,
हवे आवी छे पांखो,
राधा तारा घुंघर ना,
पडघा पडे छे,
मारा हाथ मा मारी,
मुरली रडे छे,
राधा हुं पुकारुं,
पुरी द्वारीकामां।।
सोनानी भींतो छे पण,
गोकुळनो कानो क्यां,
सोनानी थाळी पण,
राधानो पुंकारो क्यां,
द्वारीकानो राजा,
मने सौ कहे छे पण,
राजा नां रुदियां मा,
राधा रहे छे,
राधा हुं पुकारुं,
पुरी द्वारीकामां।।
छे सेवक घणां पण,
सखा नथी मारे,
कोनी साथे हैयानी,
वातो करवी क्यारे,
हवे आवते भव,
राधा थावुं मारे,
तने प्रेम करवो मारे,
विचारे विचारे,
राधा हुं पुकारुं,
पुरी द्वारीकामां।।
राधा हूँ पुकारूँ,
पुरी द्वारीकामां,
मने मारी राधा विना,
सुनु सुनु लागे,
हजारो छे राणी,
छतां रोज सांजे,
राधिका नी यादो मने,
कांटा जेवी लागे,
राधा हुं पुकारुं,
पुरी द्वारीकामां।।
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🎤 गायक / Singer – Kirtidan Ji Gadhvi
✍️ लेखक / Lyrics – Sairam Ji Dave








