हरि ने हिये न धारा रे,
वो नर पशु समान,
जिणरा धुड जमारा रे,
राम ने हिये न धारा रे,
वो नर पशु समान,
जिणरा धुड जमारा रे।।
पांवों से चल़ीयो नी गुरु पासा,
उणा नरा रा पांव कहिजे,
देवल खंभ जैसा,
राम ने हिये न धारा रे।।
हाथ से किया न पुनः दाना,
उणा नरा रा हाथ कहिजे,
वऱक्षोरा डाला,
राम ने हिये न धारा रे।।
नैण से निरखियो नहीं नंदा,
उणां नरा रा नैण कहिजे,
मोर पंख चंदा,
राम ने हिये न धारा रे।।
कान से सुणी न हरि कथा,
उणा नरा़ रा कान कहिजे,
किडीदर जेबा,
राम ने हिये न धारा रे।।
मुख से किवि ना हरि चर्चा,
उणा रामलाल यूं कहत,
जगत में बंदर जियुं फिरिया,
राम ने हिये न धारा रे।।
हरि ने हिये न धारा रे,
वो नर पशु समान,
जिणरा धुड जमारा रे,
राम ने हिये न धारा रे,
वो नर पशु समान,
जिणरा धुड जमारा रे।।
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🎤 गायक / Singer – रामनिवास जी राव।
📜 प्रेषक / Upload By – खंगार गोदारा।
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