मैं तो अर्जी लेकर,
सेठ सांवरा के आया।
दोहा – दाता थारे द्वार पर,
अंखियां बिछी हजार,
इक नजर किरपा री कर,
हो जावे उद्धार।
झोली ले दर आ गयो,
छोड़ जगत री आस,
सांवरा थारी मेहर सूं,
पूरी हो अरदास।
मैं तो अर्जी लेकर,
सेठ सांवरा के आया,
थोड़ी सर पर राख़ो नाथ,
छत्र वाली छाया।।
थारे दर री आस लगाकर,
दूर देश से आऊ मैं,
भरदो खाली झोली मारी,
रीतों कोनी जाऊ मैं,
मारा सारा दुखड़ा,
थारे आगे मैं गाया,
मैं तो अरजी लेकर,
सेठ सांवरा के आया।।
मारा घर में सुख री गंगा,
आ कर आप बहाओ जी,
सूखा पडिया बाग भाग रा,
मन का फूल खिलाओ जी,
थारी कृपा की एक बूंद के,
खातिर मैं आया,
मैं तो अरजी लेकर,
सेठ सांवरा के आया।।
ना मांगू में हीरे मोती,
ना चांदी ना सोना जी,
कर्ता क्रिया कर्म आप हो,
मैं तो सिर्फ खिलौना जी,
यहां मेरा कुछ नहीं,
सिर्फ सेठ तेरी माया,
मैं तो अरजी लेकर,
सेठ सांवरा के आया।।
मारा घर रो तू ही मालिक,
तू ही पालनहारो जी,
थारे बिन सावरियां लागे,
सुनो जग संसारो जी,
मैं ‘शानू’ सारा छोड़ जगत,
थाने ध्याया,
मैं तो अरजी लेकर,
सेठ सांवरा के आया।।
मैं तो अर्जी लेकर,
सेठ सांवरा के आया,
थोड़ी सर पर राख़ो नाथ,
छत्र वाली छाया।।
गायक – संजय कोदली।
लेखक – शानू रेगर सांवता।
9610489087








