शेष की सेज पे सोयके जो प्रभु,
नींद में सृष्टि को भार उठावे,
जिन हरि के पद-पंकज सेवत,
मात महालक्ष्मी हरसावे,
जोगि-जतिन को जो दुर्लभ सो,
लाभ अहीर की छोरियां पावे,
थोड़ी सी छाछ दिखाए के नाच,
नचावन वारे को नाच नचावे,
थोड़ी सी छाछ दिखाए के नाच,
नचावन वारे को नाच नचावे।।
नारद सारद वेद विसारद,
जाको नाम निरंतर गावे,
जाहि महेस गणेस दिनेस,
सुरेस अरु शेष अशेस बतावे,
रूप विराट जगत सम्राट है,
सुर नर मुनि जाको पार न पावे,
ताहि अहीर की छोहरियां,
छछिया भर छाछ पे नाच नचावे,
ताहि अहीर की छोहरियां,
छछिया भर छाछ पे नाच नचावे।।
शेष की सेज पे सोयके जो प्रभु,
नींद में सृष्टि को भार उठावे,
जिन हरि के पद-पंकज सेवत,
मात महालक्ष्मी हरसावे,
जोगि-जतिन को जो दुर्लभ सो,
लाभ अहीर की छोरियां पावे,
थोड़ी सी छाछ दिखाए के नाच,
नचावन वारे को नाच नचावे,
थोड़ी सी छाछ दिखाए के नाच,
नचावन वारे को नाच नचावे।।
Singer – Shri Ravindra Jain Ji








