तेरो ही सहारो लियो,
बाबा तू या जाण ले,
बणाओ बिगाड़ो दाता,
सोच ले बिचार ले।।
तर्ज – सौ साल पहले।
सारो जग भटक्यायो,
नहीं कोई आसरो पायो,
सुण नाम तेरो दाता,
तेरे दरबार में आयो,
और नहीं जाऊँ ठाणी,
मनड़े की जाण ले,
बणाओ बिगाड़ो दाता,
सोच ले बिचार ले।।
दुःख चाहे जितना हो,
मगर मुस्कान लबों पर हो,
जिस हाल में जीवन हो,
मेरा तो ध्यान तुम्ही पे हो,
दुःख दे या सुख दे दर तो,
छोड़ूँ ना ये जाण ले,
बणाओ बिगाड़ो दाता,
सोच ले बिचार ले।।
हे नाथ दया करना,
नजर कड़ी ऐसी ना करना,
पुकार तेरे बेटों की सुण,
कान्हा चल तू मत देना,
सुन कर अरदास आना,
मोरछड़ी हाथ ले,
बणाओ बिगाड़ो दाता,
सोच ले बिचार ले।।
दिल दिल है मेरे स्वामी,
कोई पत्थर ना समझ लेना,
गर बिखर गया बाबा,
हाथ तू मलते ही रहना,
कहे ‘नन्दू’ साँवरा,
पत नाम की तो राखले,
बणाओ बिगाड़ो दाता,
सोच ले बिचार ले।।
तेरो ही सहारो लियो,
बाबा तू या जाण ले,
बणाओ बिगाड़ो दाता,
सोच ले बिचार ले।।
स्वर / रचना – नंदू जी शर्मा।








