झूठी माया रो जग यो सूनो,
जीव सूनो रे हरि नाम रे बिना,
जीव सूनो रे हरी नाम रे बिना।।
काया रो रूप जवानी सूनी,
साँस सूनी रे प्राण रे बिना,
झूठी माया रो जग सूनो,
जीव सूनो रे हरी नाम रे बिना।।
महल अटारी धन दौलत सूनी,
सुख सूनो रे संतोष रे बिना,
झूठी माया रो जग सूनो,
जीव सूनो रे हरी नाम रे बिना।।
सोना चाँदी हीरा मोती सूना,
मन सूनो रे ज्ञान रे बिना,
झूठी माया रो जग सूनो,
जीव सूनो रे हरी नाम रे बिना।।
माता पिता सुत भाई बंधु,
घर सूनो रे प्रेम रे बिना,
झूठी माया रो जग सूनो,
जीव सूनो रे हरी नाम रे बिना।।
राजा रंक सब एक दिन जासी,
काया सूनी रे श्वास रे बिना,
झूठी माया रो जग सूनो,
जीव सूनो रे हरी नाम रे बिना।।
दोय कर जोड़ दास अरज करे,
हिरदो सूनो रे भगवान रे बिना,
झूठी माया रो जग सूनो,
जीव सूनो रे हरी नाम रे बिना।।
झूठी माया रो जग यो सूनो,
जीव सूनो रे हरि नाम रे बिना,
जीव सूनो रे हरी नाम रे बिना।।
गायक – नन्दकिशोर सैनी।








