बैठा बैठा ओ चलानिया माई,
मोटा धणी,
खम्मा खम्मा ओ बावजी,
खम्मां घणी।।
उच्चा डूंगर पे हरिया रुख ग़णा,
मन भावे ओ भेरू जी थाकी हरि बनी,
खम्मां खम्मां ओ बावजी,
खम्मां घणी।।
देखिया ढोल नंगारा थारे बाजता,
थारी सेवा माई बाँया माया नाचे घणी,
खम्मां खम्मां ओ बावजी,
खम्मां घणी।।
भेरू कुंवारा के मोड बंधावता,
देवे धोख जोड़ा सु दोय जणो जणी,
खम्मां खम्मां ओ बावजी,
खम्मां घणी।।
पाणी भरे ओ भेरू जी थाके डाकनिया,
थांकी महिमा जगत में घणी सुणी,
खम्मां खम्मां ओ बावजी,
खम्मां घणी।।
शानू, रामू का दुखा ने परा काट जियो,
में तो रेवाला हमेशा भेरू थारा ऋणी।,
खम्मां खम्मां ओ बावजी,
खम्मां घणी।।
बैठा बैठा ओ चलानिया माई,
मोटा धणी,
खम्मा खम्मा ओ बावजी,
खम्मां घणी।।
गायक – रमेश सालवी बिलिया।
लेखक – शानू रेगर सांवता।
मो. 9610489087








