सतसंगियो वेगा आवो थे भजन रामजी रा गावो

सतसंगियो वेगा आवो थे भजन रामजी रा गावो

सतसंगियो वेगा आवो,
थे भजन रामजी रा गावो।

दोहा – हाथ जोड़ विनती करू,
धरु चरणो में शीश,
ज्ञान भक्ति मोहे दीजो,
परम् पिता जगदीश।

सतसंगियो वेगा आवो,
थे भजन रामजी रा गावो,
थे लेवो नी भजन रो लावो,
थारे मिट जाई जमड़ो रो दावो रे हा।।



जो सतरी संगत में आवे,

वे मन वांछित फल पावे,
जो गुरू ज्ञान मे नहाले,
ज्यारा किया कर्म कट जावे,
सतसंगियों बेगा आवो,
थे भजन रामजी रा गावो,
थे लेवो नी भजन रो लावो,
थारे मिट जाई जमड़ो रो दावो रे हा।।



सतगुरू करजो सागी,

थारी दूर्मत करदे आगी,
थारे घट मे ज्योता जागी,
जद अनहंद मे धुन लागी,
सतसंगियों बेगा आवो,
थे भजन रामजी रा गावो,
थे लेवो नी भजन रो लावो,
थारे मिट जाई जमड़ो रो दावो रे हा।।



गुरू देवे तप सारा थाने,

कर दे भवजल पारा,
ए सतसंग रा उपकारा,
थु सतसंग करले प्यारा,
सतसंगियों बेगा आवो,
थे भजन रामजी रा गावो,
थे लेवो नी भजन रो लावो,
थारे मिट जाई जमड़ो रो दावो रे हा।।



शीश गुरूजी ने दीजो,

थे गुरू गम गेले वेजो,
वेगम री गम लेजो,
थे नेजो नेम रो लेजो,
सतसंगियों बेगा आवो,
थे भजन रामजी रा गावो,
थे लेवो नी भजन रो लावो,
थारे मिट जाई जमड़ो रो दावो रे हा।।



गुरू रतननाथ जी पाया,

माने सिमरत सेज बताया,
चरणो मे हरी गुण गाया,
गुरू आर पार दरसाया,
सतसंगियों बेगा आवो,
थे भजन रामजी रा गावो,
थे लेवो नी भजन रो लावो,
थारे मिट जाई जमड़ो रो दावो रे हा।।



सतसंगियो बेगा आवो,

थे भजन रामजी रा गावो,
थे लेवो नी भजन रो लावो,
थारे मिट जाई जमड़ो रो दावो रे हा।।

प्रेषक – पुखराज पटेल बांटा
9784417723


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