जो बंध गया बांके बिहारी से,
वो छूट गया दुनियादारी से,
जो रंग गया गोविंद के रंग में,
वो पहुंच गया वृंदावन में,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे राधे राधे।।
तर्ज – दिल लूटने वाले जादूगर।
गोविंद को पाने की चाहत,
तुझे गोविंद से मिलवाएगी,
ये प्रेम मोहब्बत ही एक दिन,
वृंदावन खींच ले जाएगी,
भक्ति की लहरिया तन मन में,
फिर सोया भाग्य जगाएगी,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे राधे राधे।।
ब्रजरज की महिमा कौन कहे,
ब्रजरज तो रस की खान है,
ब्रजरज जब माथे से लगती,
ये सुख तो स्वर्ग समान है,
कण-कण में माधव बसे हुए,
मोहन का लीला धाम है,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे राधे राधे।।
जो पहुंच गया वृंदावन में,
वो प्रेम का अलख जगाता है,
जो मिला है बांके बिहारी से,
सारी दुनिया में गाता है,
श्री वृंदावन की कुंजन में,
प्रेमी प्रियतम को पाता है,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे राधे राधे।।
जो बंध गया बांके बिहारी से,
वो छूट गया दुनियादारी से,
जो रंग गया गोविंद के रंग में,
वो पहुंच गया वृंदावन में,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे,
राधे राधे राधे राधे राधे राधे।।
स्वर – महावीर जी शर्मा।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
मोबाइल – 99266 52202








