मैं वृन्दावन जाउंगी,
कोई रोके ना मुझको,
रोके ना मुझको कोई,
टोके ना मुझको,
गोविंद के गुण गाउंगी,
कोई रोके ना मुझको।।
बांके बिहारी के दर्शन करुंगी,
नैना मिला के मैं सब कुछ कहूंगी,
उनको ही प्रीतम बनाऊंगी,
कोई रोके ना मुझको,
मैं वृंदावन जाउंगी,
कोई रोके ना मुझको।।
राधा रमण का कीर्तन करूंगी,
कीर्तन करूंगी सखी कीर्तन करूंगी,
दुनिया वालों से ना डरूंगी,
झूमूंगी नाचूंगी गाउंगी,
कोई रोके ना मुझको,
मैं वृंदावन जाउंगी,
कोई रोके ना मुझको।।
सोहनी मैं कर मंगला जाऊं,
मंगला जाऊं सखी मंगला जाऊं,
राधा वल्लभ जी के दर्शन पाऊं,
हरिवंशी बन जाऊंगी,
कोई रोके ना मुझको,
मैं वृंदावन जाउंगी,
कोई रोके ना मुझको।।
“अभिषेक” की सुन लो है श्यामा प्यारी,
हे श्यामा प्यारी है बृजरानी,
ब्रज में बसा लो है ठकुरानी,
तेरी ही दासी कहाऊंगी,
कोई रोके ना मुझको,
मैं वृंदावन जाउंगी,
कोई रोके ना मुझको।।
मैं वृन्दावन जाउंगी,
कोई रोके ना मुझको,
रोके ना मुझको कोई,
टोके ना मुझको,
गोविंद के गुण गाउंगी,
कोई रोके ना मुझको।।
स्वर – अभिषेक तिवारी।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
मोबाइल – 99266 52202
देखें – वृन्दावन जाउंगी सखी वृन्दावन जाउंगी।








