घर आजा सांवरिया,
की तेरे बिना नहीं जीना।
दोहा – हाथ में एक तारो लिनो,
और भगवा कीना वेश,
आओ आओ म्हारा सांवरा,
म्हारें मेड़तणी रे देश।
रिमझिम करती मीरा नाचे,
पांव में घुंघरू बांध,
हाथों में करताल बजावे,
मुख से गोविंद गाय,
दासी उदासी प्यासी मीरा,
ओ हो हो हो हो,
दासी उदासी प्यासी मीरा,
सावरियो रिझावै,
सन्ता रे संग नाचे कूदे,
हाथों से ताली बजाए कि,
घर आजा सांवरिया,
की तेरे बिना नहीं जीना।।
तर्ज – उड़ जा काले कावा।
राव दूदा की पोती मीरा,
रतन सिंह की बेटी,
उनकी माता वीरपुर,
सुल्तान सिंह की बेटी,
मेड़तिया में जन्मी मीरा,
ओ हो हो हो हो,
मेड़तिया में जन्मी मीरा,
मेवाड़ा परणाई,
राणा सांगा रे भोजराज सन्ग,
मीरा ने परणाई,
ओ घर आजा साँवरिया,
की तेरे बिना नहीं जीना।।
राजा भोज तो स्वर्ग सिधारे,
कैसी विपदा आई,
विक्रम सिंह की बात सुनकर,
मीरा व्याकुल होई,
सासु नणदल ताना मारे,
ओ हो हो हो हो,
सासु नणदल ताना मारे,
भक्ति कैसे होई,
मीरा केवे प्रभु थासू मिलणो,
किणविद होई,
ओ घर आजा साँवरिया,
की तेरे बिना नहीं जीना।।
सूली ऊपर सेज पिया की,
सोणा किणविद होई,
गगन मंडल में सेज पिया की,
मिलणो किणविद होई,
घायल की गत घायल जाणे,
ओ हो हो हो हो,
घायल की गत घायल जाणे,
जे कोई घायल होय,
दर्द मारी वन वन डोलू,
वेद मिल्या नहीं कोय,
ओ घर आजा साँवरिया,
की तेरे बिना नहीं जीना।।
जाकर ऐसा बाग लगास्या,
नित उठ दर्शन पास्या,
वृंदावन कि कुन्ज गली में,
तेरा ही गुण गास्यां,
दिन नहीं चैन रेण नहीं निंद्रा,
ओ हो हो हो हो,
दिन नहीं चैन रेण नहीं निंद्रा,
सूखू खड़ी- खड़ी,
बात विरह का लाग्या म्हारे तन में,
भुलु ना एक घड़ी,
ओ घर आजा साँवरिया,
की तेरे बिना नहीं जीना।।
कहां गया मेरा भगवा कपड़ा,
घर कदी भयो ओ सन्यासी,
जोगी होय जुगत में जाणी,
लगा जन्म तिरजासी,
अर्ज करे अबला कर जोड़े,
ओ हो हो हो हो,
अर्ज करें अबला कर जोड़े,
श्याम तुम्हारी दासी,
मीरा कै प्रभु गिरधर नागर,
काटो जन्म की फांसी,
ओ घर आजा साँवरिया,
की तेरे बिना नहीं जीना।।
रिमझिम करती मीरा नाचे,
पांव में घुंघरू बांध,
हाथों में करताल बजावे,
मुख से गोविंद गाय,
दासी उदासी प्यासी मीरा,
ओ हो हो हो हो,
दासी उदासी प्यासी मीरा,
सावरियो रिझावै,
सन्ता रे संग नाचे कूदे,
हाथों से ताली बजाए कि,
घर आजा सांवरिया,
की तेरे बिना नहीं जीना।।
गायक – जगदीश जी प्रजापत।
प्रेषक – कुलदीप सिंह राजपुरोहित।
9468586253








