अमर गुरूजी धनराज जी जोशी,
चरणों में वंदन बारंबार वो,
गुरूजी मारा ज्ञान सुणाया रे,
भक्ति का मन में दीप जलाया रे।।
भक्ति जगाई जन जन मांईने,
गुरूजी दियो सबने प्रेम संदेश वो,
गुरुदेव साचा गेला बताया रे,
भक्ति का मन में दीप जलाया रे।।
मेवाड़ी माटी रा सिरमौर जी कोई,
भजना में कीयो अमर नाम वो,
गुरूजी उचा भजन सुणाया रे,
गुरूदेव भगवन ज्ञान सुणाया रे।।
पुरा ही देश राजस्थान में गुरूजी,
सत्संग करी वो भगता माय,
वाणी या मीठी मनडा लुभाया रे,
भक्ति का मन में दीप जलाया रे।।
भाग जाग्या जी मारा पुरबला,
कोई गुरूजी रो सर माथे हाथ वो,
नमन वंदन देव गाया रे,
गुरूजी साचा गेला बताया रे,
भक्ति का मन में दीप जलाया रे।।
अमर गुरूजी धनराज जी जोशी,
चरणों में वंदन बारंबार वो,
गुरूजी मारा ज्ञान सुणाया रे,
भक्ति का मन में दीप जलाया रे।।
गायक & लेखक – देव शर्मा आमा।
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