अलबेलो यो अवसर आयो,
है मतवालो जी,
आखा तीज री है शुभ बेला,
सब मिल चालो जी,
आयो वर्षीतप रो पारणो,
यो बड़ो निरालो जी,
सब मिल चालो जी,
भक्तो सब मिल चालो जी,
आयो वर्षीतप रो पारणों,
यो बड़ो निरालो जी।।
तेरह मास री कठिन तपस्या,
वर्षीतप कहलावे जी,
करके तपस्या नर और नारी,
मन मे बड़ा हरखावे जी,
सब मिलकर के तपस्वी री,
जयकार लगाओ जी,
आयो वर्षीतप रो पारणों,
यो बड़ो निरालो जी।।
प्रथम तीर्थकर मरूदेवा नंदन,
आदिनाथ भगवान जी,
इछुरस से प्रभु करें है पारणा,
आखा तीज महान जी,
वर्षीतप करके पुण्य की,
झोली भरलो जी,
आयो वर्षीतप रो पारणों,
यो बड़ो निरालो जी।।
तप ही तारणहार जगत में,
तप री महिमा न्यारी जी,
रसना को वश करके तपस्या,
करते है नर ओर नारी जी,
वर्षीतप सा तप नहीं “दिलबर”,
भाव से करलो जी,
आयो वर्षीतप रो पारणों,
यो बड़ो निरालो जी।।
अलबेलो यो अवसर आयो,
है मतवालो जी,
आखा तीज री है शुभ बेला,
सब मिल चालो जी,
आयो वर्षीतप रो पारणो,
यो बड़ो निरालो जी,
सब मिल चालो जी,
भक्तो सब मिल चालो जी,
आयो वर्षीतप रो पारणों,
यो बड़ो निरालो जी।।
गायिका – श्रेया रांका भीलवाड़ा।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365








