जो सूरज मुख में दबा लियो,
इने जान खिलौनों उठा लियो,
यो राम काज ने करबा आलो,
कठे गयो जी हनुमान,
यो बजरंग बालो।।
यो पेताला में पोच गयो,
और राम लखन ने बचा लियो,
अहिरावण ने मारन आलो,
कटे गयो जी हनुमान,
यो बजरंग बालों।।
लक्ष्मण के शक्ति बान लग्यो,
जब तक नही सूरज आन उगयो,
ओ पर्वत ने हाथ उठा लायो,
ओ कटे गयो जी हनुमान,
यो बजरंग बालों।।
यो सात समुंदर कूद गयो,
सीता जी की सुध ले आयो,
लंका ने जाए जलाबा आलो,
ओ कटे गयो जी हनुमान,
यो बजरंग बालों।।
पर आज कटे वो दास बड़ो,
स्वामी के खातिर त्यार खड़ो,
कलयुग में लाज बचाबा आलो,
यो गावे राम कुमार,
भगत थारो मत वालो।।
जो सूरज मुख में दबा लियो,
इने जान खिलौनों उठा लियो,
यो राम काज ने करबा आलो,
कठे गयो जी हनुमान,
यो बजरंग बालो।।
गायक – राम कुमार जी मालूनी।
प्रेषक – पुष्कर चौधरी।
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