मारा आँगण म दूदा निमडी,
छाया बैठ बालो देव जी,
दियो ही कोई न,
नारायण ने ध्यान धर्यो ही कोनी,
नारायण न ध्यान दर्यो ही कोनी।।
गाया गणी र मारे,
भेस्या गणी छ,
दुदयो पीबालो,
दुदयो पीबालो,
देवजी दियो ही कोई न,
नारायण न ध्यान दर्यो ही कोनी।।
अन गणो र मारे,
माया छ मोखली,
माया माण बालो,
माया माण बालो,
देवजी दियो ही कोन,
नारायण न ध्यान दर्यो ही कोनी।।
झेला मूरख्या मार,
घरा र दरी छ,
वान परबालो,
वान परबालो,
देवजी दियो ही कोन,
नारायण न ध्यान दर्यो ही कोनी।।
मारा आँगण म दूदा निमडी,
छाया बैठ बालो देव जी,
दियो ही कोई न
नारायण ने ध्यान धर्यो ही कोनी,
नारायण न ध्यान दर्यो ही कोनी।।
प्रेषक – अनिल गुर्जर।
8000708743








