घोड़ो बाबे रो नाचे रे,
घोड़ो बाबेरो नाचे,
टपटप टापा माही,
रुणझुण घुघरा बाजे।।
भादवा महीना मे मेलो,
जोर को लागे रे,
मेलो जोर को लागे,
रूणीचा नगरी मे नेजा,
सोवणा साजे।।
रूपो दरजी घोड़ो घड़ियो,
मोत्या लड़ साजे रे बाबा,
मोत्या लड़ साजे,
बेठ घोड़े पे रामापीर जी,
आकाशा लागे।।
पांच पीर मक्का से चाल्या,
भोजनीयो मांगे रे बाबा,
भोजनीयो मांगे,
सत पकवान बण्या कृपा से,
कटोरा साजे।।
भग्ता उपर महर करी तब,
दुखड़ा सब भागे रे,
बाबा दुखड़ा सब भागे,
हाथ जोड़ भागीरथ थारा,
चरणा मे लागे।।
घोड़ो बाबे रो नाचे रे,
घोड़ो बाबेरो नाचे,
टपटप टापा माही,
रुणझुण घुघरा बाजे।।
गायक – भागीरथ भोजासर।
प्रेषक – सुभाष सारस्वा काकड़ा नोखा।
9024909170








