लाल चुनरी में सजी मेरी माँ,
दोहा – या देवी सर्वभूतेषु,
शक्ति रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै,
नमस्तस्यै नमो नमः।
लाल चुनरी में सजी मेरी माँ,
दुर्गा मैया आई द्वार,
जो भी माँ को सच्चे मन से पुकारे,
भर देती माँ उसकी झोली अपार,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ।।
माथे बिंदी लाल सुहानी,
नयनों में ममता प्यारी,
हाथों में चूड़ियाँ खनके माँ की,
भक्तों की रखवाली,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ।।
सिंह सवारी माँ भवानी,
हाथों में त्रिशूल धारी,
दुष्टों का संहार करें माँ,
भक्तों की रखवाली,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ।।
तेरे चरणों में शीश झुकाएँ,
दे दे माँ आशीष,
भक्ति दे दे शक्ति दे दे,
कर दे जीवन दीप्त,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ।।
लाल चुनरी में सजी मेरी मां,
दुर्गा मैया आई द्वार,
जो भी माँ को सच्चे मन से पुकारे,
भर देती माँ उसकी झोली अपार,
जय अम्बे जय अम्बे,
जय जगदम्बे माँ।।
Singer & Writer – Parul Gupta








