सुरीराज आ रहे है,
गुरुराज आ रहे है।
दोहा – अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः।।
गुरु चरणों में नमामी,
प्रभु वीर के पथ गामी,
है गुरुराज परम् ज्ञानी,
है ये यथार्थ निष्कामी,
ये झूमे दशो दिशाएं,
वन्दन करे फिजाए,
स्वागत में गुरूवर के,
पलके सभी बिछाएं,
महावीर के वेश में,
सुरीराज आ रहे है,
हम भक्तो के,
गुरुराज आ रहे है,
सुरीराज आ रहे हैं,
गुरुराज आ रहे है।।
जिनदत्त सुरिजी की,
महिमा बड़ी है न्यारी,
जेसलमेर नगरी में,
भक्तो की भीड़ भारी,
चादर महोत्सव के,
निश्रा दाता आ रहे है,
हम भक्तो के भगवान,
गुरुराज आ रहे है,
महावीर के वेश में,
सुरीराज आ रहे हैं,
हम भक्तो के,
गुरुराज आ रहे है।।
श्रद्धा के दीपो से,
सजी गई है राहे,
कब होंगे गुरु दर्शन,
व्याकुल है ये निगाहे,
ये करने आस पूरी,
गुरु महाराज आ रहे है,
हम भक्तो के भगवान,
गुरुराज आ रहे है,
महावीर के वेश में,
सुरीराज आ रहे हैं,
हम भक्तो के,
गुरुराज आ रहे है।।
ये दिव्य तेज मुख पे,
संयम की खुशबू महके,
कल्याण कर रहे है,
जिन आज्ञा में ही रहके,
खरतरगच्छ के ये सन्त,
दयावन्त आ रहे है,
हम भक्तो के भगवान,
गुरुराज आ रहे है,
महावीर के वेश में,
सुरीराज आ रहे हैं,
हम भक्तो के,
गुरुराज आ रहे है।।
धरती हुई ये पावन,
गुरु चरण जो पड़े है,
गुरु चरण रज को पाने,
देखो भक्त ये खड़े है,
हम भक्तो के वो,
ताज आ रहे है,
हम भक्तो के,
गुरुराज आ रहे है,
महावीर के वेश में,
सुरीराज आ रहे हैं,
हम भक्तो के,
गुरुराज आ रहे है।।
गायक – दीपक मल्लोहत्रा / ममता राउत।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’
नागदा जक्शन म.प्र.
मो. 9907023365
प्रेषक – श्री हर्ष व्यास मुम्बई।
(म्यूजिक डायरेक्टर एवम कंपोजर)
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