सेठ म्हारो मंडपिया वालो रे,
सेठ मारो मुरली वालो रे,
सेठ मारो भाग्य सुधारे वो,
चतुर्भुज मंदिर में बैठियो वो।।
श्याम रंग सूरतिया प्यारी,
मुरली मन में बाजी,
राजा हो या रंक कोई,
सबका मनडा में तू ही,
सेठ मारो मंडपिया वालो रे,
श्याम मारो मुरली वालो रे।।
मन्नत मांगे जो भी सांवरिया,
पल में पूरी करदी,
खाली हाथ ना कोई जावे,
सब की झोलिया भर दी,
सेठ मारो मंडपिया वालो रे,
श्याम मारो मुरली वालो रे।।
भोलाराम जी के सपने आया,
तीन मुरता दिखी,
बागुंड का कांकड़ में भगतां,
तीन मुरता निकली,
सेठ मारो मंडपिया वालो रे,
श्याम मारो मुरली वालो रे।।
तीन मूरत में एक ही सूरत,
एक मंडपिया में बैठी,
महावीर भजना में गावे,
सुनलो कृष्ण मुरारी,
सेठ मारो मंडपिया वालो रे,
श्याम मारो मुरली वालो रे।।
सेठ म्हारो मंडपिया वालो रे,
सेठ मारो मुरली वालो रे,
सेठ मारो भाग्य सुधारे वो,
चतुर्भुज मंदिर में बैठियो वो।।
गायक – महावीर जांगिड़।
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