साथ छूटेगा कैसे,
मेरा आपका,
जब मेरा दिल ही घर,
बन गया आपका,
साथ छूटेंगा कैसे,
मेरा आपका।।
आप आए बड़ी,
उम्र है आपकी,
बस अभी नाम मैंने,
लिया आपका,
जब मेरा दिल ही घर,
बन गया आपका,
साथ छूटेंगा कैसे,
मेरा आपका।।
डर है मुझको न बदनाम,
कर दे कहीं,
इस तरह प्यार से,
देखना आपका,
जब मेरा दिल ही घर,
बन गया आपका,
साथ छूटेंगा कैसे,
मेरा आपका।।
आपकी एक नजर,
कर गई क्या असर,
मेरा दिल था मेरा,
हो गया आपका,
जब मेरा दिल ही घर,
बन गया आपका,
साथ छूटेंगा कैसे,
मेरा आपका।।
साथ छूटेगा कैसे,
मेरा आपका,
जब मेरा दिल ही घर,
बन गया आपका,
साथ छूटेंगा कैसे,
मेरा आपका।।
स्वर – श्री अंकुश जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
9926652202








