ऊंचा भाकर माय परशुराम जी मोटा मगरा माय

ऊंचा भाकर माय बापजी,
मोटा मगरा माय।

दोहा – आडावल मे विराजीया,
श्री परशुराम महादेव,
अरे चरने थोरे आविया,
दाता पुरन किजो काज।



ऊंचा भाकर माय बापजी,

मोटा मगरा माय,
अरे अण आडावल मगरा मे,
डेरा किना मारा परशुरामजी,
किना मारा परशुरामजी,
भगता रे पधारो वेल।।



अरे आडावल मगरा रे मायने,

हरियाली बड़ी भारी,
अरे आडावल मगरा रे मायने,
हरियाली बड़ी भारी,
अरे जटे मोर रे पपैया मीठा,
बोले मारा परशुरामजी,
बोले मारा भोला शिव,
हलकारे पधारो ओ,
शिव भोले बाबा,
वेगेरा पधारो रे,
अरे मोटा मगरा माय बापजी,
ऊंचा भाकर माय,
अरे दुनिया तो दर्शन करवा,
आवे मारा परशुरामजी,
आवे मारा भोले बाबा,
वेगेरा पधारो शिव भोले बाबा,
वेगेरा पधारो जी।।



अरे सावन महीना उजाली छटको,

मेलो लागे भारी,
अरे नर नारी बालकीया,
आवे मारा परशुरामजी,
आवे मारा भोले बाबा,
हलकारे पधारो रे,
शिव भोले बाबा वेगेरा पधारो रे।।



शिव जी रे जोडे बैठे पार्वता,

गंगा बेवे शिश,
अरे शिव रे जोडे बैठे पार्वता,
गंगा बेवे शिश,
ए मेलो भरीजे बाबा आडावल रे बीच,
अरे भरीजे बाबा आडावल रे बीच।।



अरे दूर दूर ती आवे जातरू,

आवे थोरे चरना बीच,
अरे दूर दूर ती भक्त पधारे,
थोरे चरना बीच,
अरे आयोडा ने चरने राखो,
अरे आयोडा ने चरने राखो,
चरन निवावे शिश,
अरे मेलो रे भरीजे बाबा,
ओ मगरा रे बीच।।

गायक – संत कन्हैयालाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
9640557818


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