तेरा दरबार ओ बाबा,
बड़ी क़िस्मत से मिलता है,
जो आ जाए शरण तेरी,
तेरी किरपा से चलता है।।
तर्ज – मुझे तेरी मोहब्बत का।
तेरे दरबार में बाबा,
जो लेकर आस आया है,
भरी झोली सदा तुने,
ना खाली लोट पाया है,
ये वो दर है जहाँ सब कुछ,
बिना मांगे ही मिलता है,
जो आ जाए शरण तेरी,
तेरी किरपा से चलता है।।
कृपा तेरी जो ना मिलती,
तो दर दर ही भटकते हम,
करम तेरा हुआ बाबा,
कहा थे और कहाँ है हम,
तू है जीवन में तो जीवन,
मेरा उपवन सा खिलता है,
जो आ जाए शरण तेरी,
तेरी किरपा से चलता है।।
ना भुला हूँ ना भूलूंगा,
तेरे उपकार को बाबा,
सजाया घर मेरा तुमने,
यूही रहना तू संग बाबा,
‘अनुज’ कहता है घर मेरा,
तेरी किरपा से चलता है,
जो आ जाए शरण तेरी,
तेरी किरपा से चलता है।।
तेरा दरबार ओ बाबा,
बड़ी क़िस्मत से मिलता है,
जो आ जाए शरण तेरी,
तेरी किरपा से चलता है।।
Singer – Sunny Narang
7986251903
Lyrics – Anuj Jain Ji








