तेरा दरबार ओ बाबा जहाँ से न्यारा है भजन लिरिक्स

तेरा दरबार ओ बाबा जहाँ से न्यारा है भजन लिरिक्स

तेरा दरबार ओ बाबा,
जहाँ से न्यारा है।।

तर्ज – तेरी गलियों का हूँ आशिक।



तेरे दरबार ने रोते को,

हर ख़ुशी दी है,
तेरे दरबार ने मुर्दों को,
जिंदगी दी है,
तू ही माझी तू ही नैया,
तू ही किनारा है,
तेरा दरबार ओं बाबा,
जहाँ से न्यारा है।।



दिल में तड़पन रहे जिन्दा,

ये मेरी अर्जी है,
चाहे अपना चाहे ठुकरा,
ये तेरी मर्जी है,
तू ही दरिया तू ही साहिल,
तू ही किनारा है,
तेरा दरबार ओं बाबा,
जहाँ से न्यारा है।।



तेरा दरबार ओ बाबा,

जहाँ से न्यारा है।।

स्वर – सुरभि चतुर्वेदी।


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