सतगुरू प्यारे विनती सुनलो आनन्दकँद भजन लिरिक्स

सतगुरू प्यारे,
विनती सुनलो आनन्दकँद,
ओ मेरे सच्चिदानन्द,
लेलो मुझको अपनी शरण, हो..
सतगुरू प्यारे।।

तर्ज – बाबुल प्यारे।



न चाहूँ मै मोक्ष या मुक्ती,

न कोई पद या प्रतिष्ठा,
हर जीवन मे बनी रहे प्रभू,
तेरे चरणो मे निष्ठा,
विनती सुनलो आनंदकँद,
ओ मेरे सच्चिदानन्द,
ले लो मुझको अपनी शरण, हो…
सतगुरू प्यारे।।



ना चाहूँ मे ध्रुव कहलाना,

न प्रहलाद कहाऊँ,
ये भी न चाहूँ कि बनूँ सुदामा,
सेवक बनना चाहूँ,
विनती सुनलो आनंदकँद,
ओ मेरे सच्चिदानन्द,
ले लो मुझको अपनी शरण, हो…
सतगुरू प्यारे।।



मै मूरख अज्ञानी सतगुरू,

कैसे तुमको पाऊँ,
अन्जान नगर देखी न डगर प्रभू,
कैसे तुम तक आऊँ,
विनती सुनलो आनंदकँद,
ओ मेरे सच्चिदानन्द,
ले लो मुझको अपनी शरण, हो…
सतगुरू प्यारे।।



सतगुरू प्यारे,

विनती सुनलो आनन्दकँद,
ओ मेरे सच्चिदानन्द,
लेलो मुझको अपनी शरण, हो..
सतगुरू प्यारे।।

– भजन लेखक एवं प्रेषक –
शिवनारायण वर्मा,
मोबा.न.8818932923
/7987402880

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