गवलय जात में लियो रे अवतार पिपलीया में पाया अमर गति

गवलय जात में लियो रे अवतार,
पिपलीया में पाया अमर गति।।



माता गऊर का पुत्र कहाया,

बाबा भीमा का पुत्र कहाया,
गावे सखियाँ मंगलाचार,
पिपलिया में पाया अमर गति,
गवलय जात में लियों रे अवतार,
पिपलिया में पाया अमर गति।।



मनरंग शबद बाण जब लाग्या,

पूर्व जनम का भाग्य हो जाग्या,
गुरु मनरंग दियो गुरु ग्यान,
पिपलिया में पाया अमर गति,
गवलय जात में लियों रे अवतार,
पिपलिया में पाया अमर गति।।



नगर पीपलयो गांव बसाया,

ज्ञान भगति जन जन में जगाया,
वो तो गुरु आज्ञा सिर धार,
पिपलिया में पाया अमर गति,
गवलय जात में लियों रे अवतार,
पिपलिया में पाया अमर गति।।



गुरु सिंगाजी सत्यवादी सूरा,

गुरु सिंगाजी म्हारा सामरथ पूरा,
महारे राखो चरण आधार,
पिपलिया में पाया अमर गति,
गवलय जात में लियों रे अवतार,
पिपलिया में पाया अमर गति।।



गवलय जात में लियो रे अवतार,

पिपलीया में पाया अमर गति।।

प्रेषक – घनश्याम बागवान सिद्दीकगंज।
7879338198


आपको ये भजन कैसा लगा? कृपया प्ले स्टोर से भजन डायरी एप्प इनस्टॉल कीजिये।

अपनी टिप्पणी लिखें
अपना नाम दर्ज करें