शीश गंग अर्धंग पार्वती सदा विराजत कैलासी स्तुति लिरिक्स
शीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी, नंदी भृंगी नृत्य करत है, धरत ध्यान सुर सुखरासी।। शीतल मन्द सुगन्ध पवन, ...
Read moreDetailsशीश गंग अर्धंग पार्वती, सदा विराजत कैलासी, नंदी भृंगी नृत्य करत है, धरत ध्यान सुर सुखरासी।। शीतल मन्द सुगन्ध पवन, ...
Read moreDetailsऐसी बंसी बजाई मेरे श्याम ने, सारा ब्रज धाम देखो मगन हो गया, सारा ब्रज धाम देखो मगन हो गया, ...
Read moreDetailsसाधो भाई रत्न हाथ में आयो, प्रश्न - कौन तृण से तुच्छ, कौन सुमिरन से प्यारो, कौन दूध से स्वेत, ...
Read moreDetailsमीठी मीठी मुरली, बजा दे मेरे मोहन, राधा नाचने आयी रे, मेरे श्याम सलोने।। टीका तो मैं पहन के आई, ...
Read moreDetailsभगवान हमारे कीर्तन में, जरा आकर दर्श दिखा जाना, तेरी भक्ति के दीवानो पर, जरा आकर प्रेम लुटा जाना, भगवान ...
Read moreDetailsदादी के दरबार की, महिमा अपरम्पार, हरपल भक्तों के ऊपर, माँ बरसे तेरा प्यार, दादी कें दरबार की, महिमा अपरम्पार।। ...
Read moreDetailsहो हमारे श्याम ऐसे करम, तेरा ही बनु लूँ जब जनम, चाहे खुशियां मिले चाहे ग़म, होगी चाहत कभी ना ...
Read moreDetailsकावड़ उठाले ध्यान, शिव का लगाले। दोहा - शिव समान दाता नहीं, विपत्ति निवारण हार, लज्जा सब की राखियों, शिव ...
Read moreDetailsथोड़ा थोड़ा हरि का, भजन करले। दोहा - पहलो नाम प्रमेश रो, जिण जगत रचियो जोय, नर मूर्ख समझे नहीं, ...
Read moreDetailsक्यों पानी में मल मल नहाये, मन की मैल उतार, मन की मैल उतार, क्या पानी में मल मल नहावें, ...
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