भया मैं सतगुरु का बंदा कट्या भ्रम जाल का फंदा लिरिक्स
भया मैं सतगुरु का बंदा, दोहा - सेवक कुंभ कुम्हार गुरु, गढ़ गढ़ खाडे खोट, रज्जब अंदर रक्षा करें, बाहर ...
Read moreDetailsभया मैं सतगुरु का बंदा, दोहा - सेवक कुंभ कुम्हार गुरु, गढ़ गढ़ खाडे खोट, रज्जब अंदर रक्षा करें, बाहर ...
Read moreDetailsकई पंखा ढुला रियो छाया में, रामजी ने भूल गयो माया में।। कलंग कामणी को रस थु भोग्यो, विषय वासना ...
Read moreDetailsबेरी तू राम भजेलो कब रे, दोहा - गोरे गोरे तन पे तू, बावरे गुमान करे, रंग सो पतंग तेरे, ...
Read moreDetailsतुम्हीं में ये जीवन, जिए जा रहा हूँ, जो कुछ दे रहे हो, लिए जा रहा हूँ, तुम्ही में ये ...
Read moreDetailsरे मन हरि सुमिरन कर लीजे, हरी को नाम प्रेम सो जपिये, हरी रस रसना पीजे, रे मन हरि सुमिरण ...
Read moreDetailsमोर मुकुट और तिलक विशाला, पग पैजनी बैजंती माला।। पूरण ब्रम्ह सकल अविनाशी, मंगल मूरत वो सुख राशि, श्याम वरण ...
Read moreDetailsसुआ बोल राम की वाणी, दोहा - कुंजर मद मस्त मरे तो मारिए, कामनी कनक कलेश टले तो टालिए, हरि ...
Read moreDetailsराम भजन करले रे म्हारा मनवा, दोहा - लोभ सदा जिनके धन को जन, सो निश्वासर दाम भजे, भोग इच्छा ...
Read moreDetailsसतगुरु शरण गयो सुख पायो, दोहा - कहे दास सगराम, गुरु की महिमा भारी, कीकर वरणी जाय, जीब धुजे रे ...
Read moreDetailsराधिका प्रेम भक्ति रस आली, दोहा - उस भूमि को कौन बखान सके, जिस भूमि पे खेली है भानु दुलारी, ...
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