मैंने तेरे ही भरोसे अंबे माँ,
सागर में नैया डार दई।।
काहे की नाव बनाई,
काहे की पतवार,
काहे की नाव बनाई,
काहे की पतवार,
मैया काहे की लगाई जंजीर,
सागर में नैया डार दई।
मैंने तेरे ही भरोसे अंबे मां,
सागर में नैया डार दई।।
मां के नाम की नाव बनाई,
भक्ति की पतवार,
मां के नाम की नाव बनाई,
भक्ति की पतवार,
यामें ज्ञान की लगा दी जंजीर,
सागर में नैया डार दई।
मैंने तेरे ही भरोसे अंबे मां,
सागर में नैया डार दई।।
कबहुँ दुःख की धूप पड़े और,
कबहुँ सुख की छांव,
डगमग डोले जीवन नैया,
मिले ना कोई ठाँव,
तेरी कश्ती है तेरी ही पतवार,
सागर में नैया डार दई।
मैंने तेरे ही भरोसे अंबे मां,
सागर में नैया डार दई।।
ना धन मांगू ना मैं दौलत,
ना मांगू संसार,
मेरे मुख से निकले,
हर पल तेरा नाम,
तेरी कृपा से मिटे ये अंधियार,
सागर में नैया डार दई।
मैंने तेरे ही भरोसे अंबे मां,
सागर में नैया डार दई।।
तन भी तेरा मन भी तेरा,
तेरा ही संसार,
तेरी कृपा से सांसे चलती,
तू ही पालनहार,
करना अपने बच्चों का बेड़ा पार,
सागर में नैया डार दई।
मैंने तेरे ही भरोसे अंबे मां,
सागर में नैया डार दई।।
मैंने तेरे ही भरोसे अंबे माँ,
सागर में नैया डार दई।।
🎤 Singer – Shekhar Mourya








